كتاب · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
صفحة 49 من 251
المؤلف: प्रेमचंद
الوقت0:00
السرعة (WPM)0.0
الدقة100.0%
اضغط ابدأ واكتب السطور بدقة. · مفتاح الرجوع معطل — استمر حتى بعد الخطأ.
मिट्ठन के गोरे मुखड़े पर आज गर्व, उल्लास और प्रेम की जो उज्ज्वल
विभूति नजर आयी, वह अकथनीय थी। ऐसा जान पड़ा मानों उसके
जन्म-जन्मान्तर के क्लेश मिट गये हैं; वह चिन्ता और माया के बन्धनों
से मुक्त हो गयी है।
← जुलूस प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ (1950) द्वारा प्रेमचंद
रामलीला →
74148 प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ 1950 प्रेमचंद
दो बैलों की कथा जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुध्दिहीन समझा जाता
है। हम जब किसी आदमी को पहले दरजे का बेवकूफ कहना चाहते हैं तो उसे
गधा कहते है। गधा सचमुच बेवकूफ है,या उसके सीधेपन,उसकी निरापद
सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है,इसका निश्चय नही किया जा सकता।
गायें सींग मारती हैं, ब्याई हुई गाय तो अनायास ही सिंहनी का रूप
धारण कर लेती है। कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे
भी क्रोध आ ही जाता है, लेकिन गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना, न
देखा। जितना चाहो उस गरीब को मारो, चाहे जैसी खराब सङी हुई घास
सामने डाल दो। उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी न दिखायी देगी।
वैशाख में चाहे एकाघ बार कुलेल कर लेता हो; पर हमने तो उसे कभी खुश
होतें नहीं देखा। उसके चेहरे पर एक स्थायी बिषाद स्थाई रूप के छाया
रहता है। सुख-दु:ख, हानि-लाभ, किसी दशा में भी उसे बदलते नहीं देखा।
ऋषियों-मुनियों के जितने गुण है, वह सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच
गये हैं, पर आदमी उसे बेवकूफ़ कहता है। सदगुणों का इतना अनादर कहीं
नहीं देखा। कदाचित् सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है। देखिए न,
भारतवासियो की अफ्रिका में क्यों दुर्दशा हो रही है। क्यों अमेरिका
में उन्हें घुसने नही दिया जाता?
اضغط ابدأ واكتب السطور بدقة.
لم يبدأ