Sprachen

Tastatur

Seite 8 von 251

Autor: प्रेमचंद

Zeit0:00
Tempo (WPM)0.0
Genauigkeit100.0%

Start drücken und den Text exakt schreiben. · Rucktaste deaktiviert — auch bei Fehlern weitertippen.

मोहसिन ने कहा-जिन्नात को रुपये को क्या कमी! जिस खजाने में चाहें
चले जायें। लोहे के दरवाजे तक उन्हें नहीं रोक सकते जनाब, आप हैं
किस फेर में। हीरे-जवाहरात तक उनके पास रहते हैं। जिससे खुश हो गये,
उसे टोकरों जवाहरात दे दिये। अभी यहीं बैठे हैं, पाँच मिनट में
कलकत्ता पहुँच जायँ।
हामिद ने फिर पूछा-जिन्नात बहुत बड़े-बड़े होते होंगे?
मोहसिन-एक-एक आसमान के बराबर होता है जी। जमीन पर खड़ा हो जाय तो
उसका सिर आसमान से जा लगे, मगर चाहे तो एक लोटे में घुस जाय।
हामिद लोग उन्हें खुश करते होंगे? कोई मुझे वह मन्तर बता दे, तो एक
जिन्न को खुश कर लूँ।
मोहसिन-अब यह तो मैं नहीं जानता, लेकिन चौधरी साहब के काबू में बहुत
जिन्नात हैं। कोई चीज चोरी जाय चौधरी साहब उसका पता लगा देंगे और
चोर का नाम भी बता देंगे। जुमराती का बछवा उस दिन खो गया था। तीन
दिन हैरान हुए, कहीं न मिला। तब झख मारकर चौधरी के पास गये। चौधरी
ने तुरन्त बता दिया, मवेशीखाने में है, और वहीं मिला। जिन्नात पाकर
उन्हें सारे जहान की खबरें दे जाते हैं।
अब उसकी समझ में आ गया कि चौधरी के पास क्यों इतना धन है, और क्यों
उनका इतना सम्मान है।

Start drücken und den Text exakt schreiben.

Nicht gestartet