Buch · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autor: प्रेमचंद
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घमण्ड ने उसका नाम-निशान तक मिटा दिया, कोई उसे एक चिल्लू पानी
देनेवाला भी न बचा। आदमी और जो कुकर्म चाहे करे; पर अभिमान न करे,
इतराये नहीं। अभिमान किया, और दीन-दुनिया दोनों से गया। शैतान का
हाल भी पढ़ा ही होगा। उसे यह अभिमान हुआ था कि ईश्वर का उससे बढ़कर
सच्चा भक्त कोई है ही नहीं। अन्त में यह हुआ कि स्वर्ग से नरक में
ढकेल दिया गया। शाहेरूम ने भी एक बार अहंकार किया था। भीख
मांग-माँगकर मर गया। तुमने तो अभी केवल एक दरजा पास किया है, और अभी
से तुम्हारा सिर फिर गया, तब तो तुम आगे बढ़ चुके। यह समझ लो कि तुम
अपनी मेहनत से नहीं पास हुए, अन्धे के हाथ बटेर लग गयी। मगर बटेर
केवल एक बार हाथ लग सकती है, बार-बार नहीं लग सकती। कभी-कभी
गुल्ली-डण्डे में भी अन्धा-चोट निशाना पड़ जाता है। इससे कोई सकल
खिलाड़ी नहीं हो जाता। सफल खिलाड़ी वह है, जिसका कोई निशाना खाली न
जाय। मेरे फेल होने पर न जाओ। मेरे दरजे में आओगें, तो दॉतों पसीना
आ जायगा, जब अलजबरा और जामेट्री के लोहे के चने चबाने पड़गे,
इंगलिस्तान का इतिहास पढ़ना पड़ेगा। बादशाहों के नाम याद रखना आसान
नहीं। आठ-आठ हेनरी हो गुजरे हैं। कौन-सा कांड किस हेनरी के समय में
हुआ, क्या यह याद कर लेना आसान समझते हो?
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