Book · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Author: प्रेमचंद
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मियाँ नूरे के वकील का अन्त उनके प्रतिष्ठानुकूल इससे ज्यादा गौरवमय
हुआ। वकील जमीन पर या ताक पर तो नहीं बैठ सकता। उसकी मर्यादा का
विचार तो करना ही होगा। दीवार में दो खूँटिया गाड़ी गयीं। उन पर
लकड़ी का एक पटरा रखा गया। पटरे पर कागज का कालीन बिछाया गया। वकील
साहब राजा भोज की भाँति सिंहासन पर विराजे। नूरे ने उन्हें पंखा
झलना शुरू किया। अदालतों में खस की टट्टियाँ और बिजली के पंखे रहते
हैं। क्या यहाँ मामूली पंखा भी न हो! कानून की गर्मी दिमाग पर चढ़
जायगी कि नहीं। बाँस का पंखा आया और नूरे हवा करने लगे। मालूम नहीं,
पंखे की हवा से, या पंखे की चोट से वकील साहब स्वर्ग-लोक से
मृत्युलोक में आ रहे और उनका माटी का चोला माटी में मिल गया! फिर
बड़े जोर-शोर से मातम हुआ और वकील साहब की अस्थि घूरे पर डाल दी
गयी।
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