Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Pagina 23 de 251
Autor: प्रेमचंद
Tiempo0:00
Velocidad (WPM)0.0
Precisión100.0%
Pulsa iniciar y escribe las líneas exactamente. · Retroceso desactivado — continua incluso tras un error.
विजेता को हारनेवालों से जो सत्कार मिलना स्वाभाविक है, वह हामिद को
भी मिला। औरों ने तीन-तीन, चार-चार आने पैसे खर्च किये पर कोई काम
की चीज न ले सके। हामिद ने तीन पैसे में रंग जमा लिया। सच ही तो है,
खिलौनों का क्या भरोसा? टूट-फूट जायँगे। हामिद का चिमटा तो बना
रहेगा बरसो।
सन्धि की शर्ते तय होने लगीं। मोहसिन ने कहा-जरा अपना चिमटा दो, हम
भी देखें। तुम हमारा भिश्ती लेकर देखो।
महमूद और नूरे ने भी अपने अपने खिलौने पेश किये।
हामिद को इन शर्तों के मानने में कोई आपत्ति न थी। चिमटा बारी-बारी
से सबके हाथ में गया, और उनके खिलोने बारी-बारी से हामिद के हाथ में
आये। कितने खूबसूरत खिलौने हैं!
हामिद ने हारनेवालों के आँसू पोछे-मैं तुम्हें चिढ़ा रहा था, सच। यह
लोहे का चिमटा भला इन खिलौने की क्या बराबरी करेगा; मालूम होता है,
अब बोले, अब बोले।
लेकिन मोहसिन की पार्टी को इस दिलासे से सन्तोष नहीं होता। चिमटे का
सिक्का खूब बैठ गया है। चिपका हुआ टिकट अब पानी से नहीं छूट रहा।
मोहसिन-लेकिन इन खिलौने के लिए कोई हमें दुआ तो न देगा?
Pulsa iniciar y escribe las líneas exactamente.
Sin iniciar