Langues

Clavier

Page 14 sur 251

Auteur: प्रेमचंद

Temps0:00
Vitesse (WPM)0.0
Précision100.0%

Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes. · Retour arriere desactive — continuez meme apres une erreur.

मोहसिन कहता है-मेरा भिश्ती रोज पानी दे जायगा; साँझ-सबेरे।
महमूद-और मेरा सिपाही घर का पहरा देगा। कोई चोर आयेगा, तो फौरन
बन्दूक फैर कर देगा।
नूरे-और मेरा वकील खूब मुकदमा लड़ेगा।
सम्मी-और मेरी धोबिन रोज कपड़े धोयेगी।
हामिद खिलौनों की निन्दा करता है-मिट्टी ही के तो हैं, गिरें तो
चकनाचूर हो जाय; लेकिन ललचाई हुई आँखों से खिलौनों को देख रहा है।
और चाहता है कि जरा देर के लिए उन्हें हाथ में ले सकता। उसके हाथ
अनायास ही लपकते हैं; लेकिन लड़के इतने त्यागी नहीं होते, विशेष-कर
जब अभी नया शौक है। हामिद ललचता रह जाता है।
खिलौने के बाद मिठाइयाँ आती हैं। किसी ने रेवड़ियाँ ली हैं, किसी ने
गुलाब जामुन, किसी ने सोहन हलवा। मजे से खा रहे हैं। हामिद बिरादरी
से पृथक है। अभागे के पास तो न पैसे हैं। क्यों नहीं कुछ लेकर खाता?
ललचायी आँखों से सबकी ओर देखता है।
मोहसिन कहता है-हामिद, रेवड़ी ले जा, कितनी खुशबूदार है!

Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes.

Non démarré