Livre · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Auteur: प्रेमचंद
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मैं नहीं कह सकता कि सूर्यप्रकश की उन्नति देखकर मुझे कितना
आश्चर्यमय आनन्द हुआ। अगर वह मेरा पुत्र होता, तो भी इससे अधिक
आनन्द न होता। मै उसे अपने झोंपड़े में लाया और अपनी रामकहानी कह
सुनायी।
सूर्यप्रकाश ने कहा -- तो यह कहिए कि आप अपने ही एक भाई के
विश्वासघात के शिकार हुए। मेरा अनुभव तो अभी बहुत कम है; मगर इतने
ही दिनों में मुझे मालूम हो गया है, कि हम लोग अभी अपनी
जिम्मेदारियों को पूरा करना नहीं जानते। मिनिस्टर साहब से भेंट हुई,
तो पूछूँगा, कि यही आपका धर्म था?
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