Livre · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Auteur: प्रेमचंद
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यह कहकर भगतजी घर की ओर चले कि चौधरी दौड़कर उनके गले से लिपट गये।
तीन पुश्तों की अदावत एक क्षण में शान्त हो गयी।
उसी दिन से चौधरी और भगत साथ-साथ स्वराज्य का उपदेश करने लगे। उनमें
गाढ़ी मित्रता हो गयी और यह निश्चय करना कठिन था कि दोनों में जनता
किसका अधिक सम्मान करती है।
प्रतिद्वन्दिता की चिनगारी ने दोनों पुरुषों के हृदय-दीपक को
प्रकाशित कर दिया था।
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74149 प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ 1950 प्रेमचंद
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