Langues

Clavier

Page 33 sur 251

Auteur: प्रेमचंद

Temps0:00
Vitesse (WPM)0.0
Précision100.0%

Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes. · Retour arriere desactive — continuez meme apres une erreur.

लोगों को खयाल आया, शहर के लाखों आदमियों की निगाहें हमारी तरफ लगी
हुई हैं। यहाँ से यह झण्डा लेकर हम लौट जायें, तो फिर किस मुँह से
आजादी का नाम लेंगे; मगर प्राण-रक्षा के लिए भागने का किसी को ध्यान
भी न आता था। यह पेट के भक्तों, किराये के टट्टुओं का दल न था। यह
स्वाधीनता के सच्चे स्वयंसेवकों का, आजादी के दीवानों का संगठित दल
था--अपनी जिम्मेदारियों को खूब समझता था। कितनों ही के सिरों से खून
जारी था, कितनों ही के हाथ जख्मी हो गये थे। एक हल्ले में यह लोग
सवारों की सफों को चीर सकते थे, मगर पैरों में बेड़ियाँ पड़ी हुई
थीं--सिद्धान्त की, धर्म की, आदर्श की। दस-बारह मिनट तक यों ही
डण्डों की बौछार होती रही और लोग शान्त खड़े रहे।
(२)
इस मार-धाड़ की खबर एक क्षण में बाजार में जा पहुँची। इब्राहिम
घोड़े से कुचल गये, कई आदमी जख़्मी हो गये, कई के हाथ टूट गये; मगर
न वे लोग पीछे फिरते हैं और न पुलिस उन्हें आगे जाने देती है।
मैकू ने उत्तेजित होकर कहा-अब तो भाई, यहाँ नहीं रहा जाता। मैं भी
चलता हूँ।
दीनदयाल ने कहा-हम भी चलते हैं भाई, देखी जायगी!

Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes.

Non démarré