Livre · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Auteur: प्रेमचंद
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संयोग की बात, झूरी ने एक बार गोई को ससुराल भेज दिया। बैलों को
क्या मालूम, वे क्यो भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच
दिया। अपना यो बेचा जाना उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन जाने, पर
झूरी के साले गया को घर तक गोई ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।
पीछे से हॉकता तो दोनों दाएँ-बाएँ भागते, पगहिया पकड़कर आगे से
खींचता, तो दोनों पीछे को जोर लगाते। मारता तो दोनों सींग नीचे करके
हुँकारते। अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते-तुम
हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? हमने तो तुम्हारी सेवा करने में
कोई कसर नहीं उठा रखी। अगर इतनी मेहनत से काम न चलता था तो और काम
लेते। हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था। हमने कभी
दाने-चारे की शिकायत नहीं की। तुमने जो कुछ खिलाया, वह सिर झुकाकर
खा लिया, फिर तुमने हमें इस जालिम के हाथ क्यों बेच दिया?
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