Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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सब चर्खियों से उतरते हैं। अब खिलौने लेंगे। इधर दुकानों की कतार
लगी हुई है। तरह-तरह के खिलौने हैं-सिपाही और गुजरिया, राजा और
वकील, भिश्ती और धोबिन और साधू। वाह! कितने सुन्दर खिलौने हैं। अब
बोला ही चाहते हैं। महमूद सिपाही लेता है, खाकी वर्दी और लाल
पगड़ीवाला, कन्धे पर बन्दूक रखे हुए। मालूम होता है, अभी कवायद किये
चला आ रहा है। मोहसिन को भिश्ती पसन्द आया। कमर झुकी हुई है, ऊपर
मशक रखे हुए है। मशक का मूँह एक हाथ से पकड़े हुए है। कितना प्रसन्न
है। शायद कोई गीत गा रहा है। बस, मशक से पानी उँड़ेला ही चाहता है।
नूरे को वकील से प्रेम है। कैसी विद्वता है उनके मुख पर! काला
चुग़ा, नीचे सफेद अचकन, अचकन के सामने की जेब में घड़ी, सुनहरी
जंजीर, एक हाथ में कानून का पोथा लिये हुए। मालूम होता है, अभी किसी
अंदालत से जिरह या बहस किये चले आ रहे हैं। यह सब दो-दो पैसे के
खिलौने हैं। हामिद के पास कुल तीन पैसे हैं, इतने मँहगे खिलौने वह
कैसे ले? खिलौना कहीं हाथ से छूट पड़े, तो चूर-चूर हो जाय। जरा पानी
पड़े तो सारा रंग धुल जाय। ऐसे खिलौने लेकर वह क्या करेगा, किस काम
के!
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