Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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हामिद को सन्देह हुआ, यह केवल क्रूर विनोद है, मोहसिन इतना उदार
नहीं है, लेकिन यह जानकर भी वह उसके पास जाता है मोहसिन दोने से एक
रेवड़ी निकालकर हामिद की ओर बढ़ाता है। हामिद हाथ फैलाता है। मोहसिन
रेवड़ी अपने मुंँह में रख लेता है। महमूद, नूरे और सम्मी खूब
तालियाँ बजा बजाकर हँसते हैं। हामिद, खिसिया जाता है।
मोहसिन-अच्छा, अबकी जरूर देंगे हामिद, अल्ला कसम, ले जा।
हामिद-रखे रहो। क्या मेरे पास पैसे नहीं हैं? सम्मी-तीन ही पैसे तो
हैं। तीन पैसे में क्या-क्या लोगे?
अहमद-हमसे गुलाब जामुन ले जाव हामिद। मोहसिन बदमाश है।
हामिद-मिठाई कौन बड़ी नेमत है। किताब में इसकी कितनी बुराइयाँ लिखी
हैं।
मोहसिन-लेकिन दिल में कह रहे होगे कि मिले तो खा लें। अपने पैसे
क्यों नहीं निकालते?
महमूद-हम समझते हैं इसकी चालाकी। जब हमारे सारे पैसे खर्च हो
जायेंगे, तो हमें ललचा-ललचाकर खायगा।
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