Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Pagina 199 di 251
Autore: प्रेमचंद
Tempo0:00
Velocita (WPM)0.0
Precisione100.0%
Premi inizia e digita le righe esattamente. · Backspace disattivato — continua anche dopo un errore.
दोपहर हो गयी थी। किसान लोग खेतों से चले आ रहे थे। उन्हें विनोद का
अच्छा अवसर मिला। महादेव को चिढ़ाने में सभी को मजा आता था। किसी ने
कंकड़ फेंके, किसी ने तालियाँ बजायीं; तोता फिर उड़ा और वहाँ से दूर
आम के बाग में एक पेड़ की फुनगी पर जा बैठा। महादेव फिर खाली पिजरा
लिये, मेंढक की भाँति उचकता चला। बाग में पहुँचा, तो पैर के तलुओं
से भाग निकल रही थी, सिर चक्कर खा रहा था। जब जरा सावधान हुआ, तो
फिर पिंजरा उठाकर कहने लगा- "सत्त गुरुदत्त शिवदत्त दाता।' तोता
फुनगी से उतरकर नीचे की एक डाल पर आ बैठा; किन्तु महादेव की ओर सशक
नेत्रों से ताक रहा था। महादेव ने समझा, डर रहा है। वह पिंजड़े को
छोड़कर आप एक दूसरे पेड़ की आड़ में छिप गया। तोते ने चारो ओर गौर
से देखा। निश्शंक हो गया, उतरा, और आकर पिंजरे के ऊपर बैठ गया।
महादेव का हृदय उलझने लगा। 'सत्त गुरुदत्त शिवदत्त दाता' का मन्त्र
जपता हुआ, धीरे-धीरे, तोते के समीप आया, और लपका कि तोते को पकड़
ले; किन्तु तोता हाथ न आया, फिर पेड़ पर जा बैठा।
Premi inizia e digita le righe esattamente.
Non iniziato