Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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अरुणोदय का समय था। प्रकृति एक अनुरागमय प्रकाश में डूबी हुई थी।
उसी समय तोता परों को जोड़े हुए ऊँची डाली से उतरा; जैसे आकाश से
कोई तारा टूटे, और आकर पिंजड़े में बैठ गया। महादेव प्रफुल्लित होकर
दौड़ा, और पिंजड़े को उठाकर बोला-'आओ आत्माराम, तुमने कष्ट तो बहुत
दिया, पर मेरा जीवन भी सफल कर दिया। अब तुम्हें चाँदी के पिंजड़े
में रखूँगा, और सोने से मढ़ दूंँगा।' उसके रोम-रोम से परमात्मा के
गुणानुवाद की ध्वनि निकलने लगी-प्रभु, तुम कितने दयावान् हो! यह
तुम्हारा असीम वात्सल्य है, नहीं तो मुझ जैसा पापी पतित प्राणी कब
इस कृपा के योग्य था! इन पवित्र भावों से उसकी आत्मा विह्वल हो गयी।
वह अनुरक्त होकर कह उठा-
'सत्त गुरदत्त शिवदत्त दाता,
राम के चरन में चित्त लागा।'
उसने एक हाथ में पिंजड़ा लटकाया, बगल में कलसा दबाया, और घर चला।
( ५ )
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