Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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'एकाध को सींगों पर उठाकर फेक दूंँगा।'
'लेकिन जानते हो वह प्यारी लड़की, जो हमे रोटियाँ खिलाती है, उसी की
लड़की है, जो इस घर का मालिक है। वह बेचारी अनाथ हो जायगी।'
'तो मालकिन को न फेक दूँ। वही तो उस लड़की को मारती है।'
'लेकिन औरत जात पर सीग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।'
'तुम तो किसी तरह निकलने ही नहीं देते। तो आओ, आज तुड़ाकर भाग चलें।
'हाँ, यह मैं स्वीकार करता हूँ; लेकिन इतनी मोटी रस्सी टूटेगी
कैसे!'
'इसका उपाय है। पहले रस्सी को थोड़ा-सा चबा लो। फिर एक झटके में
जाती है।'
रात को जब बालिका रोटियाँ खिलाकर चली गयी, तो दोनों रस्सियाँ चबाने
लगे; पर मोटी रस्सी मुँह में न आती थी। बेचारे बार-बार जोर लगाकर रह
जाते थे।
सहसा घर का द्वार खुला, और वही लड़की निकली। दोनों सिर झुकाकर उसका
हाथ चाटने लगे। दोनों की पूछे खड़ी हो गयीं। उसने उनके
४ माथे सहलाये और बोली-खोले देती हूँ। चुपके से भाग जा़ओ, नहीं यहाँ
लोग मार डालेंगे। आज घर में सलाह हो रही है कि इनकी नाकों में नाथ
डाल दी जाय।
उसने गरॉव खोल दिया; पर दोनों चुपचाप खड़े रहे।
मोती ने अपनी भाषा में पूछा-अब चलते क्यों नहीं?
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