Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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ईश्वरी ने शंका निवारण की-महात्मा गाँधी के भक्त हैं साहब! खद्दर के
सिवा और पहनते ही नही। पुराने सारे कपड़े जला डाले! यों कहो कि राजा
हैं। ढाई लाख सालाना की रियासत है। पर आपकी सूरत देखो तो मालूम होता
है, अभी अनाथालय से पकड़कर आये हैं।
रामहरख बोले-अमीरों का ऐसा स्वभाव बहुत कम देखने में आता है। कोई
भाँप ही नहीं सकता।
रियासत अली ने समर्थन किया-आपने महाराजा चांँगली को देखा होता तो
दांँतों उँगली दबाते। एक गाढ़े की मिर्जई और चमरौधा जूता पहने
बाजारों में घूमा करते थे। सुनते हैं, एक बार बेगार में पकड़ सके थे
और उन्हीं ने दस लाख से कालेज खोल दिया।
मैं मन में कटा जा रहा था; पर न जाने क्या बात थी कि यह सफेद झूठ उस
वक्त मुझे हास्यास्पद न जान पड़ा। उसके प्रत्येक वाक्य के साथ मानों
मै उस कल्पित वैभव के समीपतर आता जाता।
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