Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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हीरा ने तिरस्कार किया-गिरे हुए वैरी पर सींग न चलाना चाहिए।
'यह सब ढोंग है। वैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।'
'अब घर कैसे पहुंचेगे, यह सोचो।'
'पहले कुछ खा ले, तो सोचे।
सामने मटर का खेत था ही। मोती उसमें घुस गया। हीरा मना करता रहा; पर
उसने एक न सुनी। अभी दो-ही-चार ग्रास खाये थे कि दो आदमी लाठियाँ
लिये दौड़ पड़े, और दोनों मित्रों को घेर लिया। हीरा तो मेंड़पर था,
निकल गया। मोती सींचे हुए खेत में था। उसके खुर कीचड़ में धँसने
लगे। भाग न सका। पकड़ लिया गया। हीरा ने देखा, संगी संकट में है, वो
लौट पड़ा। फॅसेंगे तो दोनो साथ फँसेंगे। रख वालों ने उसे भी पकड़
लिया।
प्रातःकाल दोनों मित्र कॉंजीहौस में बन्द कर दिये गये।
( ५ )
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