本 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
251ページ中227ページ
著者: प्रेमचंद
時間0:00
速度 (WPM)0.0
正確性100.0%
スタートを押して行を正確に入力してください。 · バックスペース無効 — エラー後も続行してください。
इन दोनों सज्जनों ने गाँव को दो विरोधी दलों में विभक्त कर दिया था।
एक दल की भंग-बूटी चौधरी के द्वार पर छनती तो दूसरे दल के चरस-गाँजे
के दम भगत के द्वार पर लगते थे। स्त्रियों और बालकों के भी दो-दो दल
हो गये थे। यहाँ तक कि दोनों सज्जनों के सामाजिक और धार्मिक विचारों
में भी विभाजक रेखा खिंची हुई थी। चौधरी कपड़े पहने सत्तू खा लेते
और भगत को ढोंगी कहते। भगत बिना कपड़े उतारे पानी भी न पीते और
चौधरी को भ्रष्ट बतलाते। भगत सनातन-धर्मों बने तो चौधरी ने आर्य
समाज का आश्रय लिया। जिस बजाज, पन्सारी या कुंजड़े से चौधरी सौदा
लेते उसकी ओर भगतजी ताकना भी पाप समझते थे और भगतजी के हलवाई की
मिठाइयाँ, उसके ग्वाले का दूध और तेली का तेल चौधरी के लिए त्याज्य
था। यहाँ तक कि उनके आरोग्य के सिद्धान्तों में भी सिन्नता थी,
भगतजी वैद्यक के कायल थे, चौधरी यूनानी प्रथा के माननेवाले। दोनों
चाहे रोग से मर जाते, पर अपने सिद्धान्तों को न छोड़ते।
( २ )
スタートを押して行を正確に入力してください。
未開始