도서 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
251페이지 중 141페이지
저자: प्रेमचंद
시간0:00
속도 (WPM)0.0
정확도100.0%
시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요. · 백스페이스 비활성화 — 오류 후에도 계속 입력하세요.
सभी फौजी अटेंशन की दशा में निश्चल खड़े हो गये।
'होश-हवाश ठीक रखना।
सभी पूर्ण सचेत हो गये।
'अच्छा तो सुनिए कान खोलकर, इस शहर का सफाया है। इस शहर का ही नहीं,
सम्पूर्ण भारत का सफाया है। अमेरिका के एक हब्शी का नाम आ गया।
बड़े ठाकुर मल्लाये-झूठ, झूठ, बिलकुल झूठ!
छोटे ठाकुर ने पैंतरा बदला-कभी नहीं। तीन महीने की तपस्या यों हो
रही! वाह! प्रकाश ने छाती ठोककर कहा-यहाँ सिर फुड़वाये और हाथ
तुड़वाये बैठे हैं; दिल्लगी है!
इतने में और पचासों आदमी इधर से रोनी सूरत लिये निकले। ये बेचारे भी
डाकखाने से अपनी किस्मत को रोते चले आ रहे थे। मार ले गया अमेरिका
का हब्शी! अभागा! पिशाच! दुष्ट!
अब कैसे किसी को विश्वास न आता। बड़े ठाकुर झल्लाये हुए मन्दिर में
गये और पुजारी को डिसमिस कर दिया-इसी लिए तुम्हें इतने दिनों से पाल
रखा है! हराम का माल खाते हो और चैन करते हो।
छोटे ठाकुर साहब की तो जैसे कमर टूट गयी। दो-तीन बार सिर पीटा और
वहीं बैठ गये; मगर प्रकाश के क्रोध का पारावार न था। उसने अपना मोटा
सोटा लिया और झक्कड़ बाबा की मरम्मत करने चला।
시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요.
시작 안 됨