도서 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
251페이지 중 153페이지
저자: प्रेमचंद
시간0:00
속도 (WPM)0.0
정확도100.0%
시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요. · 백스페이스 비활성화 — 오류 후에도 계속 입력하세요.
( ३ )
मगर काम करना तो मानवी स्वभाव है। बेकारी में जीवन कैसे कटता। मैंने
एक छोटी सी पाठशाला खोल ली; एक वृक्ष की छाँह में, गाँव के लड़कों
को जमा कर कुछ पढ़ाया करता था। उसकी यहाँ इतनी ख्याति हुई कि आसपास
के गाँव के छात्र भी आने लगे।
एक दिन मैं अपनी कक्षा को पढ़ा रहा था कि पाठशाला के पास एक मोटर
आकर रुकी और उसमें से जिले के डिप्टी कमिश्नर उतर पड़े। मैं उस समय
केवल एक कुर्त्ता और धोती पहने हुए था। इस वेश में एक हाकिम से
मिलते हुए शर्म आ रही थी। डिप्टी कमिश्नर मेरे समीप आये तो मैने
झेंपते हुए हाथ बढ़ाया; मगर वह मुझसे हाथ मिलाने के बदले मेरे पैरों
की ओर झुके और उन पर सिर रख दिया। मैं कुछ ऐसा सिट-पिटा गया कि मेरे
मुँह से एक शब्द भी न निकला। मैं अँगरेजी अच्छी लिखता हूँ;
दर्शनशास्त्र का भी आचार्य हूँ, व्याख्यान भो अच्छे दे लेता हूँ,
मगर इन गुणों में एक भी श्रद्धा के योग्य नहीं। श्रद्धा तो
ज्ञानियों और साधुओं ही के अधिकार की वस्तु है। अगर मैं ब्राह्मण
होता, तो एक बात थी। हालाँकि एक सिविलयन का किसी ब्राह्मण के पैरों
पर सिर रखना अचिन्तनीय है।
시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요.
시작 안 됨