도서 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
251페이지 중 234페이지
저자: प्रेमचंद
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एक शंका--सरकार अधर्म से रुपया कमाती है, उसे यह उचित नहीं है!
अधर्मी के राज में रहकर प्रजा का कल्याण कैसे हो सकता है? दूसरी
शंका--पहले दारू पिलाकार पागल बना दिया। लत पड़ी तो पैसे की चाट
हुई। इतनी मजूरी किसको मिलती है कि रोटी-कपड़ा भी चले और दारू-शराब
भी उड़े। या तो बाल-बच्चों को भूखों मारो या चोरी करो, जूआ खेलो और
बेईमानी करो। शराब की दुकान क्या है, हमारी गुलामी का अड्डा है।
४चौधरी के उपदेश सुनने के लिए जनता टूटती थी, लोगों को खड़े होने की
जगह न मिलती। दिनों-दिन चौधरी का मान बढ़ने लगा; उनके यहाँ पंचायतों
की, राष्ट्रोन्नति की चर्चा रहती। जनता को इन बातो से बड़ा आनन्द और
उत्साह होता। उनके राजनैतिक ज्ञान की वृद्धि होती। वे अपना गौरव और
महत्व समझने लगे, उन्हें अपनी सत्ता का अनुभव होने लगा, निरंकुशता
और अन्याय पर अब उनकी त्योरियाँ चढ़ने लगीं। उन्हें स्वतन्त्रता का
स्वाद मिला। घर की रुई, घर का सूत, घर का कपड़ा, घर का भोजन, घर की
अदालत, न पुलिस का भय, न अमलों की खुशामद, सुख और शान्ति से जीवन
व्यतीत करने लगे। कितनों ही ने नशेबाजी छोड़ दी और सद्भावों की एक
लहर-सी दौड़ने लगी।
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