언어

키보드

251페이지 중 81페이지

저자: प्रेमचंद

시간0:00
속도 (WPM)0.0
정확도100.0%

시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요. · 백스페이스 비활성화 — 오류 후에도 계속 입력하세요.

खैर, मीर साहब के दीवानखाने में शतरंज होते कई महीने गुज गये।
नये-नये नक्शे हल किये जाते; नये-नये किले बनाये जाते; नित. नयी
ब्यूह-रचना होती; कभी-कभी खेलते-खेलते झौड़ हो जाती; तू-तू मैं-मैं
तक की नौबत आ जाती। पर शीघ्र ही दोनों मित्रों में मेल हो जाता।
कभी-कभी ऐसा भी होता कि बाजी उठा दी जाती; मिर्जाजी रूठकर अपने घर
चले आते; मीर साहब अपने घर में जा बैठते। पर रात भर की निद्रा के
साथ सारा मनोमालिन्य शान्त हो जाता था। प्रातःकाल दोनों मित्र
दीवानख़ाने में आ पहुँचते थे।
एक दिन दोनों मित्र बैठे शतरंज की दलदल में गोते खा रहे थे कि.इतने
में घोड़े पर सवार एक बादशाही फौज का अफसर मीर साहब का नाम् पूछता
हुआ था पहुँचा। मोर साहब के होश उड़ गये। यह क्या बला सिर पर आयी!
यह तलबी किस लिए हुई। अब खैरियत नहीं नज़र आती! भार के दरवाजे बन्द
कर लिये। नौकरों से बोले- कह दो, घर में नहीं हैं। सवार--घर में
नहीं, तो कहाँ हैं?
नौकर--यह मैं नहीं जानता। क्या काम है?

시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요.

시작 안 됨