Jezyki

Klawiatura

Strona 6 z 251

Autor: प्रेमचंद

Czas0:00
Predkosc (WPM)0.0
Dokladnosc100.0%

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie. · Backspace wylaczony — pisz dalej nawet po bledzie.

बड़ी-बड़ी इमारतें आने लगीं। यह अदालत है, यह कालेज है, यह क्लबघर
है! इतने बड़े कालेज में कितने लड़के पढ़ते होंगे। सब लड़के नहीं
हैं जी। बड़े-बड़े आदमी हैं, सच। उनकी बड़ी-बड़ी मूँछे हैं। इतने
बड़े हो गये, अभी तक पढ़ने जाते हैं। न जाने कब तक पढ़ेंगे और क्या
करेंगे इतना पढ़कर। हामिद के मदरसे में दो-तीन बड़े-बड़े लड़के हैं,
बिलकुल तीन कौड़ी के, रोज मार खाते हैं, काम से जी चुरानेवाले। इस
जगह भी उसी तरह के लोग होंगे और क्या। क्लबघर में जादू होता है।
सुना है, यहाँ मुरदे की खोपड़ियाँ दौड़ती हैं। और बड़े-बड़े तमाशे
होते हैं, पर किसी को अन्दर नहीं जाने देते। और यहाँ शाम को साहब
लोग खेलते हैं। बड़े-बड़े आदमी खेलते हैं, मूंँछों-दाढ़ीवाले और
मेमें भी खेलती हैं, सच। हमारी अम्माँ को वह दे दो, क्या नाम है,
बैट, तो उसे पकड़ ही न सकें। घुमाते ही लुढ़क न जायँ।
महमूद ने कहा-हमारी अम्मीजान का तो हाथ कांँपने लगे, अल्ला कसम।

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie.

Nie rozpoczeto