Jezyki

Klawiatura

Strona 64 z 251

Autor: प्रेमचंद

Czas0:00
Predkosc (WPM)0.0
Dokladnosc100.0%

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie. · Backspace wylaczony — pisz dalej nawet po bledzie.

बाड़े की दीवार कच्ची थी। हीरा मजबूत तो था ही, अपने नुकीले सींग
दीवार में गड़ा दिये और जोर मारा, तो मिट्टी का एक चिप्पड़ निकल
आया। फिर तो उसका साहस बढ़ा। उसने दौड़-दौड़कर दीवार पर चोटें की और
हर चोट में थोड़ी-थोड़ी मिट्टी गिराने लगा।
उसी समय काँजीहौस का चौकीदार लालटेन लेकर जानवरों की हाजिरी लेने आ
निकला। हीरा का यह उजड्डपन देखकर उसने उसे कई डंडे रसीद किये और
मोटी-सी रस्सी से बाँध दिया।
मोती ने पड़े-पड़े कहा-आखिर मार खाई, क्या मिला?
'अपने बूते-भर जोर तो मार लिया।'
'ऐसा जोर मारना किस काम का कि और बंधन में पड़ गये।'
'जोर तो मारता हो जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जायँ।' 'जान से
हाथ धोना पड़ेगा।'
'कुछ परवाह नहीं। यो भी तो मरना ही है। सोचो, दीवार खुद जाती, तो
कितनी जान बच जातीं। इतने भाई यहाँ बन्द हैं। किसी की देह में जान
नहीं है। दो-चार दिन और यही हाल रहा, तो सब मर जायँगे।'
'हाँ, यह बात तो है। अच्छा तो लो, फिर मैं भी जोर लगाता हूँ।

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie.

Nie rozpoczeto