Jezyki

Klawiatura

Strona 77 z 251

Autor: प्रेमचंद

Czas0:00
Predkosc (WPM)0.0
Dokladnosc100.0%

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie. · Backspace wylaczony — pisz dalej nawet po bledzie.

मिर्ज़ा घर से निकले, तो हकीम के घर जाने के बदले मीर साहब के घर
पहुँचे, और सारा वृत्तांत कहा। मीर साहब बोले--मैंने तो जब मुहरे
बाहर आते देखे, तभी ताड़ गया। फौरन भागा। बड़ी गुस्सेवर मालूम होती
हैं। मगर आपने उन्हें यों सिर चढ़ा रखा है, यह मुनासिब नहीं। उन्हें
इससे क्या मतलब कि आप बाहर क्या करते हैं। घर का इन्तजाम करना उनका
काम है; दूसरी बातों से उन्हें क्या सरोकार?
मिर्जा--खैर, यह तो बताइए, अब कहाँ जमाव होगा?
मीर--इसका क्या ग़म--इतना बड़ा घर पड़ा हुआ है। बस यहीं जमे।
मिर्जा--लेकिन बेगम साहबा को कैसे मनाऊँगा? जब घर पर बैठा रहता था,
तब तो वह इतना बिगड़ती थीं; यहाँ बैठक होगा, तो शायद जिन्दा न
छोड़ेंगी।
मीर--अजी, बकने भी दीजिए; दो-चार रोज में आप ही ठीक हो जायँगी। हाँ,
आप इतना कीजिए कि आज से जरा तन जाइए। २

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie.

Nie rozpoczeto