Jezyki

Klawiatura

Strona 83 z 251

Autor: प्रेमचंद

Czas0:00
Predkosc (WPM)0.0
Dokladnosc100.0%

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie. · Backspace wylaczony — pisz dalej nawet po bledzie.

दूसरे दिन दोनों मित्र मुँह अंधेरै घर से निकल खड़े होते। बगल में
एक छोटी-सी दरो दबाये, डिब्बे में गिलौरियाँ भरे गोमती पारकर एक
पुरानी वीरान मसजिद में चले जाते, जिसे शायद नवाब आसफउद्दौला ने
बनवाया था। रास्ते में तम्बाकू, चिलम और मदरिया ले लेते, और मसजिद
में पहुँच, दरी बिछा, हुक्का भरकर शतरंज खेलने बैठ जाते थे। फिर
उन्हें दीन-दुनिया की फिक्र न रहती थी। 'किश्त', 'शह' आदि दो-एक
शब्दों के सिवा उनके मुँह से और कोई वाक्य नहीं निकलता था। कोई योगी
भी समाधि में इतना एकाग्र न होता होगा। दोपहर को जब भूख मालूम होती,
तो दोनों मित्र किसी नानबाई की दुकान पर जाकर खाना खा आते, और एक
चिलम हुक्का पीकर फिर संग्रामक्षेत्र में डट जाते। कभी-कभी तो
उन्हें भोजन का भी खयाल न रहता था।

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie.

Nie rozpoczeto