Livro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autor: प्रेमचंद
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शंकर ने विप्रजी के यहाँ २० वर्ष तक गुलामी करने के बाद इस दुस्सार
संसार से प्रस्थान किया। १२०) अभी तक उसके सिर पर सवार थे। पंडितजी
ने उस गरीब को ईश्वर के दरबार में कष्ट देना उचित न समझा, इतने
अन्यायी, इतने निर्दय न थे। उसके जवान बेटे की गरदन पकड़ी। आज तक वह
विप्रजी के यहाँ काम करता है। उसका उद्धार कब होगा, होगा भी या
नहीं, ईश्वर ही जाने।
पाठक! इस वृत्तांत को कपोल-कल्पित न समझिए। यह सत्य घटना हैं। ऐसे
शंकरों और ऐसे विप्रों से दुनिया खाली नहीं है।
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लाग-डाँट
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