Livro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autor: प्रेमचंद
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बीरबल ने मिट्ठन बाई की ओर आँखों का भाला चलाया; पर मुँह से कुछ न
बोले।
एक तीसरी महिला ने फिर कहा-हम एक जलसा करके आपको जयमाल पहनायेंगे और
आपका यशोगान करेंगे। चौथी ने कहा-आप बिलकुल अँगरेज़ मालूम होते हैं,
जभी इतने गोरे हैं।
एक बुढ़िया ने आँखें चढ़ाकर कहा-मेरी कोख में ऐसा बालक जन्मा होता,
तो उसकी गर्दन मरोड़ देती।
एक युवती ने उसका तिरस्कार करके कहा-आप भी खूब कहती हैं माताजी;
कुत्ते तक तो नमक का हद अदा करते हैं, यह तो आदमी हैं।
बुढ़िया ने झल्लाकर कहा-पेट के गुलाम, हाय पेट! हाय पेट!
इस पर कई स्त्रियों ने बुढ़िया को आड़े हाथों लिया और वह बेचारी
लज्जिन होकर बोली-अरे, मैं कुछ कहती थोड़े ही हूँ, मगर ऐसा आदमी भी
क्या, जो स्वार्थ के पीछे अन्धा हो जाय।
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