Idiomas

Teclado

Pagina 70 de 251

Autor: प्रेमचंद

Tempo0:00
Velocidade (WPM)0.0
Precisao100.0%

Pressione iniciar e digite as linhas exatamente. · Backspace desativado — continue mesmo apos erro.

दढ़ियल झल्लाकर बैलों को जबरदस्ती पकड़ ले जाने के लिए बढ़ा। उसी
वक्त मोती ने सींग चलाया। दढ़ियल पीछे हटा। मोती ने पीछा किया।
दढ़ियल भागा। मोती पीछे दौड़ा। गाँव के बाहर निकल जाने पर वह रुका;
पर खडा दढ़ियल का रास्ता देख रहा था। दढ़ियल दूर खड़ा धमकियाँ दे
रहा या, गालियाँ निकाल रहा था, पत्थर फेंक रहा था। और मोती विजयो
शूर की भाँति उसका रास्ता रोके खड़ा था। गाँव के लोग तमाशा देखते
थे, और हँसते थे। जब दढ़ियल हारकर चला गया, तो मोती अकड़ता हुआ
लौटा।
हीरा ने कहा-मै डर रहा था कि कहीं तुम गुस्से में आकर मार न बैठो।
'अगर वह मुझे पकड़ता, तो मैं बे-मारे न छोड़ता।'
'अब न आयेगा।'
'आयेगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखू कैसे ले जाता है!'
'जो गोली मरवा दे?'
'मर जाऊँगा; पर उसके काम तो न आऊँगा।'
'हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।'
'इसी लिए कि हम इतने सीधे होते हैं।'
जरा देर में नौदों में खली, भूसा, चोकर, दाना भर दिया गया और दोनों
मित्र खाने लगे। झूरी खड़ी दोनों को सहला रहा था और बीसों लड़के
तमाशा देख रहे थे। सारे गाँव में उछाह-सा मालूम होता था।
उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिये।

Pressione iniciar e digite as linhas exatamente.

Nao iniciado