Книга · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Автор: प्रेमचंद
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तोता एक खपरैल पर बैठा था। महादेव ने पिजरा उतार लिया, और उस दिखाकर
कहने लगा-'आ, आ, सत्त गुरुदत्त शिवदत्त दाता।' लेकिन गाँव और घर के
लड़के एकत्र होकर चिल्लाने और तालियाँ बजान लगे। ऊपर से कौओं ने
कांव-काँव की रट लगायी। तोता उड़ा, और गाँव से बाहर निकलकर एक पेड़
पर आ बैठा। महादेव खाली पिंजड़ा लिये उसके पीछे दौड़ा, सो दौड़ा।
लोगों को उसकी द्रतगामिता पर अचम्भा हो रहा था। मोह को इससे सुन्दर,
इससे सजीव, इससे भावमय कल्पना नहीं की जा सकती।
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