Книга · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Страница 19 из 251
Автор: प्रेमचंद
Время0:00
Скорость (WPM)0.0
Точность100.0%
Нажмите старт и печатайте строки точно. · Backspace отключен — продолжайте даже после ошибки.
हामिद ने चिमटे को जमीन पर पटककर कहा-जरा अपना भिश्ती जमीन पर गिरा
दो। सारी पसलियाँ चूर-चूर हो जाय बच्चा की।
महमूद बोला-यह चिमटा कोई खिलौना है!
हामिद-खिलौना क्यों नहीं है? अभी कन्धे पर रखा, बन्दूक हो गयी। हाथ
में ले लिया, फकीरों का चिमटा हो गया। चाहूँ तो इससे मजीरे का काम
ले सकता हूँ। एक चिमटा जमा दूंँ तो तुम लोगों के सारे खिलौनों की
जान निकल जाय। तुम्हारे खिलौने कितना ही जोर लगाये, मेरे चिमटे का
बाल भी बांका नहीं कर सकते। मेरा बहादुर शेर है-चिमटा।
सम्मी ने खंजरी ली थी। प्रभावित होकर बोला-मेरी खंँजरी से बदलोगे?
दो आने की है।
हामिद ने खँजरी की ओर उपेक्षा से देखा-मेरा चिमटा चाहे तो तुम्हारी
खँजरी का पेट फाड़ डाले। बस, एक चमड़े की झिल्ली लगा दी, ढब-ढब
बोलने लगी। जरा-सा पानी लग जाय तो खतम हो जाय। मेरा बहादुर चिमटा आग
में, पानी में, आँधी में, तूफान में बराबर डटा खड़ा रहेगा।
Нажмите старт и печатайте строки точно.
Не начат