Diller

Klavye

Sayfa 12 / 251

Yazar: प्रेमचंद

Süre0:00
Hız (WPM)0.0
Doğruluk100.0%

Başlat düğmesine bastıktan sonra yazmaya başla. · Backspace devre dışı — yanlış yazsan da devam et.

नमाज खत्म हो गयी है। लोग आपस में गले मिल रहे हैं। तब मिठाई और
खिलौने की दूकानों पर धावा होता है। ग्रामीणों का यह दल इस विषय में
बालकों से कम उत्साही नहीं है। यह देखो, हिंडोला है। एक पैसा देकर
चढ़ जाओ। कभी आसमान पर जाते हुए मालून होगे, कभी जमीन पर गिरते हुए।
यह चखी है, लकड़ी के हाथी, घोड़े, ऊँट छड़ों से लटके हुए हैं। एक
पैसा देकर बैठ जाओ और पच्चीस चक्करों का मजा लो। महमूद और मोहसिन और
नूरे और सम्मी इन घोड़ों और ऊँटों पर बैठते हैं। हामिद दूर खड़ा है।
तीन ही पैसे तो उसके पास हैं। अपने कोष का एक तिहाई जरा-सा चक्कर
खाने के लिए वह नहीं दे सकता।

Başlat düğmesine bastıktan sonra yazmaya başla.

Başlatılmadı