图书 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
第104页 / 共251页
作者: प्रेमचंद
时间0:00
速度 (WPM)0.0
准确率100.0%
按开始并准确输入每行文字。 · 退格键已禁用 — 即使输入错误也请继续。
संक्षेप में तो चार पन्ने हुए, नहीं शायद सौ-दो सौ पन्ने लिखवाते।
तेज भी दौङिए और धीरे-धीरे भी। है उलटी बात या नहीं? बालक भी
इतनी-सी बात समझ सकता है। लेकिन इन अध्यापको को इतनी तमीज भी नहीं।
उस पर दावा है कि हम अध्यापक हैं। मेरे दरजे में आओगे लाला, तो ये
सारे पापड़ बेलने पड़ेंगे और तब आटे-दाल का भाव मालूम होगा। इस दरजे
में अव्वल आ गये हो, तो जमीन पर पाँव नहीं रखते। इसलिए मेरा कहना
मानिए। लाख फेल हो गया हूँ, लेकिन तुमसे बड़ा हूँ, संसार का मुझे
तुमसे ज्यादा अनुभव है। जो कुछ कहता हूँ, उसे गिरह बांधिए, नहीं
पछताइएगा।
按开始并准确输入每行文字。
未开始