图书 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
第170页 / 共251页
作者: प्रेमचंद
时间0:00
速度 (WPM)0.0
准确率100.0%
按开始并准确输入每行文字。 · 退格键已禁用 — 即使输入错误也请继续。
बीस साल गुजर गये। मैंने इजीनियरी पास की और उसी जिले का दौरा करता
हुआ उसी कस्बे में पहुँचा और डाक बंँगले में ठहरा। उस स्थान को
देखते ही इतनी मधुरं बाल-स्मृतियाँ हृदय में जाग उठी कि मैंने छड़ी
उठायी और कस्बे को सैर करने निकला। आँखें किसी प्यासे पथिक की भाँति
बचपन के उन क्रीड़ा स्थलों को देखने के लिए व्याकुल हो रही थीं; पर
उस परिचित नाम के सिवा वहाँ और कुछ परिचित न था। जहाँ खँडहर था,
वहाँ पक्के मकान खड़े थे। जहाँ बरगद का पुराना पेड़ था, वहाँ अब एक
सुन्दर बगीचा था। स्थान को काया-पलट हो गयी थी। अगर उसके नाम और
स्थिति का ज्ञान न होता, तो मैं इसे पहचान भी न सकता। बचपन को संचित
और अमर स्मृतियाँ बाहें खोले अपने उन पुराने मित्रों से गले मिलने
को अधीर हो रही थी; मगर वह दुनिया बदल गयी थी। ऐसा जी होता था कि उस
धरती से लिपट कर रोऊँ और कहूँ तुम मुझे भूल गयी! मैं तो अब भी
तुम्हारा वही रूप देखना चाहता हूँ।
सहसा एक खुली हुई जगह में मैंने दो-तीन लड़कों को गुल्ली-डण्डा
खेलते देखा। एक क्षण के लिए मैं अपने को बिलकुल भूल गया! भूल गया कि
मैं एक ऊँचा अफसर हूँ, साहबी ठाठ में, रोब और अधिकार के आवरण में।
按开始并准确输入每行文字。
未开始