图书 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
第27页 / 共251页
作者: प्रेमचंद
时间0:00
速度 (WPM)0.0
准确率100.0%
按开始并准确输入每行文字。 · 退格键已禁用 — 即使输入错误也请继续。
'यह चिमटा कहाँ था?'
'मैंने मोल लिया है।' 'कै पैसे में?
'तीन पैसे दिये।'
अमीना ने छाती पीट ली। यह कैसा बेसमझ लड़का है कि दोपहर हुआ, कुछ
खाया न पिया। लाया क्या, चिमटा! सारे मेले में तुझे और कोई चीज न
मिली, जो यह लोहे का चिमटा उठा लाया?
हामिद ने अपराधी-भाव से कहा-तुम्हारी उँगलियाँ तवे से जल जाती थीं;
इसलिए मैंने इसे लिया।
बुढ़िया का क्रोध तुरन्त स्नेह में बदल गया, और स्नेह भी वह नहीं,
जो प्रगल्भ होता है और अपनी सारी कसक शब्दों में बिखेर देता है। यह
मूक स्नेह था, खूब ठोस, रस और स्वाद से भरा हुआ। बच्चे में कितना
त्याग, कितना सद्भाव और कितना विवेक है! दूसरों को खिलौने लेते खीर
मिठाई खाते देखकर इसका मन कितना ललचाया होगा। इतना जब्त इससे हुआ
कैसे! वहाँ भी इसे अपनी बुढ़िया दादी की याद बनी रही। अमीना का मन
गदगद हो गया।
और अब एक बड़ी विचित्र बात हुई। हामिद के इस चिमटे से भी विचित्र।
बच्चे हामिद ने बूढ़े हामिद का पार्ट खेला था। बुढ़िया अमीना बालिका
अमीना बन गयी। वह रोने लगी। दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती
थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती जाती थी। हामिद इसका रहस्य
क्या समझता!
按开始并准确输入每行文字。
未开始