Livre · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Auteur: प्रेमचंद
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हेनरी सातवें की जगह, हेनरी आठवाँ लिखा और सब नम्बर गायब!सफाचट?
सिफर भी न मिलेगा, सिफर भी! हो किस खयाल में। दरजनों तो जेम्स हुए
हैं, दरजनों विलियम, कोड़ियों चार्ल्स! दिमाग चक्कर खाने लगता है।
आँधी रोग हो जाता है। इन अभागों को नाम भी न जुड़ते थे। एक नाम के
पीछे दोयम, सेयम, चहारम, पंचम लगाते चले गये। मुझसे पूछते, तो दस
लाख नाम बता देता। और जामेट्री तो बस खुदा की पनाह! अब ज की जगह अ ज
ब लिख दिया और सारे नम्बर कट गये। कोई इन निर्दयी मुमतहिनों से नहीं
पूछता कि आखिर अ ब ज और अ ज ब में क्या फर्क है, और व्यर्थ की बात
के लिए क्यों छात्रों का खून करते हो। दाल-भात रोटी खायी या
भात-दाल-रोटी खायी, इसमें क्या रखा है; मगर इन परीक्षकों को क्या
परवाह! वह तो वही देखते हैं, जो पुस्तक में लिखा है। चाहते हैं कि
लड़के अक्षर-अक्षर रट डालें। और इसी रटन्त का नाम शिक्षा रख छोड़ा
है। और आखिर इन बे-सिर-पैर की बातों के पढ़ने से फायदा? इस रेखा पर
वह लम्ब गिरा दो, तो आधार लम्ब से दुगना होगा। पूछिए, इससे प्रयोजन?
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