언어

키보드

251페이지 중 44페이지

저자: प्रेमचंद

시간0:00
속도 (WPM)0.0
정확도100.0%

시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요. · 백스페이스 비활성화 — 오류 후에도 계속 입력하세요.

जुलूस शहर की मुख्य सड़कों से गुजरता हुआ चला जा रहा था। दोनों ओर
छतों पर, छजों पर, जंगलों पर, वृक्षों पर दर्शकों की दीवारें-सी
खड़ी थीं। बीरबलसिह को आज उनके चेहरों पर एक नयी स्फूर्ति, एक नया
उत्साह, एक नया गर्व झलकता हुआ मालूम होता था। स्फूर्ति थी वृद्धों
के चेहरों पर, उत्साह युवको के और गर्व रमणियों के। यह स्वराज्य के
पथ पर चलने का उल्लास था। अब उनकी यात्रा का लक्ष्य अज्ञात न था,
पथ-भ्रष्टो की भाँति इधर-उधर भटकना न था, दलितों को भाँति सिर
झुकाकर रोना न था। स्वाधीनता का सुनहला शिखर सुदूर आकाश में चमक रहा
था। ऐसा जान पड़ता था, लोगों को बीच के नालों और जंगलों की परवा
नहीं है, सब उस सुनहले लक्ष्य पर पहुँचने के लिए उत्सुक हो रहे हैं।

시작을 누르고 줄을 정확히 입력하세요.

시작 안 됨