Diller

Klavye

Sayfa 54 / 251

Yazar: प्रेमचंद

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घर और गॉव के लड़के जमा हो गये और तालियाँ बजा-बजाकर उनका स्वागत
करने लगे। गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी
महत्वपूर्ण थी। बाल-सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को
अभिनन्दन-पत्र देना चाहिए कोई अपने घर से रोटियाँ लाया, कोई गुड़,
कोई चोकर, कोई भूसी।
एक बालक ने कहा-ऐसे बैल किसी के पास न होंगे।
दूसरे ने समर्थन किया-इतनी दूर से दोनों अकेले चले आये।
तीसरा बोला-बैल नहीं हैं वे, उस जन्म के आदमी हैं।
इसका प्रतिवाद करने का किसी को साहस न हुआ।
झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। बोली कैसे
नमकहराम बैल हैं कि एक दिन भी वहाँ काम न किया। भाग खड़े हुए।
झूरी अपने बैलों पर यह आक्षेप न सुन सका-नमकहराम क्यों हैं?
चारा-दाना न दिया होगा, तो क्या करते!
स्त्री ने रोब के साथ कहा-बस, तुम्हीं तो बैलों को खिलाना जानते हो,
और तो सभी पानी पिला-पिलाकर रखते हैं। झूरी ने चिढ़ाया-चारा मिलता
तो क्यो भागते?

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