Kitap · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Sayfa 65 / 251
Yazar: प्रेमचंद
Süre0:00
Hız (WPM)0.0
Doğruluk100.0%
Başlat düğmesine bastıktan sonra yazmaya başla. · Backspace devre dışı — yanlış yazsan da devam et.
मोती ने भी दीवार में उसी जगह सींग मारा। थोड़ी-सी मिट्टी गिरी और
हिम्मत बढ़ी। फिर तो वह दीवार में सींग लगाकर इस तरह जोर करने लगा,
मानों किसी द्वन्द्वी से लड़ रहा है। आखिर कोई दो घंटे की जोर आजमाई
के बाद दीवार ऊपर से लगभग एक हाथ गिर गयी उसने दूनी शक्ति से दूसरा
धक्का मारा, तो आधी दीवार गिर पड़ी।
दीवार का गिरना था कि अधमरे-से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे। तीनों
घोड़ियाँ सरपट भाग निकलीं। फिर बकरियाँ निकलीं। इसके बाद भैसे भी
खिसक गयी; पर गधे अभी तक ज्यों-के-यों खड़े थे।
हीरा ने पूछा-तुम दोनों क्यों नहीं भाग जाते?
एक गधे ने कहा-जो कहीं फिर पकड़ लिये जाय?
'तो क्या हरज है। अभी तो भागने का अवसर है।'
'हमें तो डर लगता है। हम यहीं पड़े रहेंगे।'
आधी रात से ऊपर जा चुकी थी। दोनों गधे अभी तक खड़े सोच रहे थे,
भागें या न भागें। और मोती अपने मित्र की रस्सी तोड़ने में लगा हुआ
था, जब वह हार गया तो, हीरा ने कहा-तुम जाओ, मुझे मुझे यहीं पड़ा
रहने दो। शायद कहीं भेंट हो जाय।
Başlat düğmesine bastıktan sonra yazmaya başla.
Başlatılmadı